झोला झाप डॉक्टर की इलाज का खमियाजा भुगत रही ये युवती, निजी अस्पताल में भर्ती करा कर भागा झोलाझाप डॉक्टर

शिखर36गढ़ :- मस्तूरी बिलासपुर, विजय सुमन , हरिओम झोलाझाप  डॉक्टरों को कहीं विभागीय पनाह तो नहीं मिल रहा इन्हें आखिर कब होगा कार्यवाही ..?मल्हार नगर पंचायत  की  गलियों  से लेकर मुख्य बस स्टैंड  तक झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार हो गई है। आलम यह है कि एक-एक लाइन से  दो दो तीन तीन  क्लीनिक चल रहे हैं। बिना किसी डिग्री के क्लिनिक चला रहे हैं तो कोई शहरों के निजी अस्पताल में छोटीमोटी ईलाज सीखने के बाद डॉक्टर बन गए वही  एक ऐसा बंगाली डॉक्टर हैं जो कपड़ा दुकान के आड़ में क्लिनिक चला रहा हैं  यहां छोटे से छोटे और बड़े से बड़े हर मर्ज का ईलाज इनके यहा होता है। ताजा मामला सामने आया है  एक झोलाछाप डॉक्टर  प्यारे लाल गन्धर्व के  द्वारा इलाज में लापरवाही बरतने से ग्राम बूढ़ीखार की धारमिन केवट पिता अंतु राम केवट 19 वर्ष को कुछ दिनों पहले ही तबियत खराब और कमजोरी महसूस हो रही

वह झोलाझाप डॉक्टर से इंजेक्शन लगवाई और दो तीन दिन बाद कमर के निचले हिस्से से मवाद निकलने लगा आनन फानन में झोलाझाप डॉक्टर उसे निजी अस्पताल में भर्ती कर छोड़ दिया अब यह गरीब परिवार के पास इलाज कराने के लिए पैसे नही जमीन बेच कर 90 हजार रुपये  जमा किया लेकिन पैसे की कमी के कारण चार दिनों से इलाज बन्द हैं इस युवती के परिजनों का रो रो कर बुरा हाल हो गया इधर झोलाझाप डॉक्टर प्यारे लाल गन्धर्व इलाज कराने के नाम पर पीड़ित परिजनों को टालमटोल कर रहा है और इलाज करवाने में कोताही बरत रहे हैं ।
नगर पंचायत मल्हार में झोलाझाप डाॅक्टर प्यारे लाल गन्धर्व के जैसे और भी डॉक्टर हैं जो घूम घूम कर घरों में जाकर इलाज करताइन डॉक्टरों द्वारा सीधे ठीक करने का ठेका भी लिया जाता हैं अगर मरीज थोड़ा ठीक भी है और इनके ईलाज अगर वो बीमार पड़ जाए तो इससे इनको कोई परवाह नहीं है।  इन झोलाछाप डॉक्टरों का लक्ष्य सिर्फ चंद पैसे कमाना ही होता है। यही वजह है कि आए दिन गरीब तबके के लोग इन जैसे डॉक्टरों के शिकार हो जाते हैं, जिससे वह अपनी जान तक गंवा बैठते हैं। इसके बावजूद भी ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाये जाते।  यह लोग इन डाॅक्टरों से 30-50 ₹. में दवा लेते हैं। जिसका खामयाजा कई बार उन्हें अपनी मौत को गले लगाकर चुकाना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ध्यान नही देते झोलाछाप डॉक्टर क्लीनिक चला रहे हैं। उन्हें पता है कि विभाग कभी छापेमारी करने नहीं आएगा चूंकि विभागीय अधिकारियों के साथ उनकी सांठ-गांठ रहती है। किसी शिकायत पर अगर छापेमारी हो भी जाती है तो इसकी जानकारी इन्हें पहले ही मिल जाती है। इतना ही नही  इलाज के बाद खुद मेडिकल भी रखे हैं और मरीजो को इलाज के बाद दवाई भी दिया जाता यह दवाई सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार झोलाझाप डॉक्टरो को एमआर गांव में जाकर उपलब्ध कराते हैं यही नहीं इन झोलाझाप डॉक्टरों के पास  दवाईयों को भी आसानी से लिया जा सकता है जिन पर बैन है।
पीड़िता के पिता अंतु राम केवट ने जानकारी दी हैं कि उनकी बेटी की तबियत बिगड़ने पर झोलाझाप डॉक्टर प्यारेलाल लाल गन्धर्व ने  इलाज करवाने के लिए बिलासपुर के निजी अस्पताल महादेवा में भर्ती कर दिया और किसी को बताने से भी मन कर दिया इलाज का खर्च उठाने की बात कही और खर्च भी नही दे रहा इधर चार दिनों से पैसे के अभाव में इलाज बन्द हो गया है ।

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